(जागरण, Sep 28, 2009)
कश्मीरी के हिंदी लेखकों की रचनाओं के एक प्रतिनिधि चयन 'हम लौटेंगे वहीं' का लोकार्पण रविवार को केएल सहगल हाल में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। कश्मीरी भाषा एवं संस्कृति प्रतिष्ठान 'सम्प्रति' की ओर से प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन महाराज कृष्ण संतोषी ने किया है। जम्मू यूनिवर्सिटी हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ओपी गुप्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सोमनाथ वीर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मंचन संचालन सम्प्रति के सचिव विजय बली ने किया। कार्यक्रम में सम्प्रति के अध्यक्ष डा. आर एल भट्ट ने कहा कि सम्प्रति ऐसे लोगों का एक खुला मंच है जो अपने प्रयासों से अधिकाधिक लोगों तक 'तस्वीर का असली चेहरा' प्रस्तुत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि संस्था का सरोकार मानवता से जुड़ा है। इसके अन्य सरोकारों का कश्मीर के इतिहास, उस की संस्कृति, कला तथा साहित्य से सम्बद्ध है। कश्मीरी भाषा में पहले ही ऐसे कई संकलन प्रकाशित हो चुके हैं लेकिन हिंदी भाषा में यह उनका पहला प्रयास है। 'हम लौटेंगे वहीं' के संपादक महाराज कृष्ण संतोषी ने कहा कि धार्मिक कट्टरता का ही परिणाम है कि आज कश्मीरी पंडित विस्थापित हो कर बैठे हुए हैं। धर्म की आड़ में हजारों लोगों का संहार हुआ है और जान बचाने के लिए निर्दोष लोगों को बेवतन होना पड़ा। उन्होंने बताया क पुस्तक में जो चयन किया गया है वह कश्मीर के निर्वासन साहित्य का प्रतनिधित्व जरूर करता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. ओपी गुप्त ने 'हम लौटेंगे वहीं' के प्रकाशन को साहित्य जगत के लिए एक सफल प्रयास बताया।
Wednesday, December 23, 2009
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